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sharir ho gayaa hai , body is done

शरीर हो गया है, बीमारियों का आवास  धीरे - धीरे होने लगा है , शरीर का हास   सबकुछ होकर भी, लगता है कुछ नहीं  क्या हाल हो गया मेरा, कि तू पूछ नहीं  प्रदीप कछावा  7000561914 prkrtm36@gmail.com 

man mai vichar aate hai, thoughts come to mind

  मन में ना -ना प्रकार के, विचार आते है अन्दर ही अन्दर, ये झिंझोड़ जाते है  ना जाने क्यों ये मन, हो जाता है उदास  कि जिधर देखो ऊधर ही, गम पाते है  प्रदीप कछावा  7000561914 prkrtm36@gmail.com 

जिधर देखो, wherever you look

  जिधर देखो ऊधर, तुम्हें ही पाते है  ठंडी हवा के झोंके, तेरी याद लाते है  ज़रा पास आ जाओ, तुम मेरे कि  करनी है  बहुत सारी, प्यार की बाते है  प्रदीप कछावा  7000561914 prkrtm36@gmail.com

sansaar ,the world

यह संसार है , दू:खों का घर  मिलती नहीं है, सुकून कि डगर   प्रदीप कछावा  7000561914 prkrtm36@gmail.com

hai prabhu ,oh god

jaat-paat

नहीं होना चाहिए, इंसानों मैं जात-पात  रहना चाहिए, सभी को साथ -साथ इस रूडीवादी,  परम्परा को मिटाना है  तभी बनेगी, हम सब की बात  प्रदीप कछावा  7000561914 prkrtm36@gmail.com

यार गद्दार

  पैसे के कारण, यार बन गया गद्दार  क्यों कर दिया, पीठ पीछे से वार  हम  तो दोस्त समझ कर ही, बैंठे थे तुम्हें पर तुम तो निकल गए, इतने बैकार प्रदीप कछावा  7000561914 prkrtm36@gmail. Because of money, friend became a traitor Why did you hit me from behind? We were sitting only considering you as friends But you have left, so desperate Pradeep Kachhawa 7000561914 prkrtm36@gmail.